
ऐसे करें हनुमान अराधना, होगा कष्ट का नाश!
नई दिल्ली। कोई हनुमान जी से प्रार्थना करता है...
जय हनुमंत संत हितकारी, सुन लीजे प्रभु अरज हमारी, जनके काज विलम्ब न कीजे आतुर दौरी महासुख दीजे।
या कोई कहता है...
राशिफल: ऐसे करें हनुमान अराधना, होगा कष्ट का नाश!
को नहि जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारौ।
क्योंकि हम जानते है के कलयुग के देवता हनुमान हमारा कल्याण अवश्य करेंगे। कैसे करें, हनुमद आराधना, जिससे हमे मिले रुद्रावतार की कृपा।
हर मनुष्य अपने जीवन में सुख, समृद्धि, शान्ति चाहता है तथा अपनी समस्त अभिलाषाए परिपूर्ण करने हेतु हर प्रकार से प्रयत्न भी करता है। किन्तु लाख भागीरथ प्रयास करने के बाद भी या तो यह मिलते नहीं और मिल भी जाएं तो क्षणिक होते हैं। असफलता का कारण जाने बिना ही मनुष्य खिन्न रहता है, उदास रहता और उसका विश्वास, निष्ठा, देवी-देवता, पूजा-पाठ आदि से उठ जाता है। उसका प्रमुख कारण किसी लालच या अविश्वास से की गई आराधना, आप जब भी कोई पूजा पाठ करें तो उस पूजा में तथा उस देवता में पूरी निष्ठा अनिवार्य है। ऐसे में जब आप सब कुछ कर के हार गए तो ये मत सोचिए की आपकी सफलता के सभी मार्ग बंद है या अवरोधित है। कलयुग में आशा की किरण व कल्याण के देवता हनुमान जी का द्वार आप के लिए ही है। किसी भी प्रकार के दु:खों, कष्टों या संकटों का निराकरण करने के लिए हमारे ऋषियों ने संकटमोचन हनुमान जी की उपासना का बड़ा सरल व सक्षम माध्यम प्रतिपादित किया है।
संकट मोचन हनुमान
आयुर्वेद व अन्य प्रमाणिक शास्त्रों के अनुसार 'हनुमान' शब्द का शाब्दिक अर्थ है प्राण वायु अर्थात हमारी आती जाती जो श्वास है जिसके बिना जीवित रहना प्राणियों के लिए असंभव है, वह है हनुमान। यह पवन पुत्र सर्वव्याप्त है। ‘सुदर्शन संहिता’ के अनुसार श्री हनुमान जी जगत (ब्रह्मांड) के उत्साह, साहस एवं विश्वास के प्रतीक हैं। ‘गरुड़ी तन्त्र’ के अनुसार जब प्राणीमात्र में उत्साह, साहस एवं विश्वास जाग्रत हो जाता है, तब व्यक्ति अपनी कठिन से कठिन समस्या या संकट का समाधान करने में समर्थ हो जाता है। ‘अगस्त संहिता’ में उत्साह, साहस एवं विश्वास को हनुमान जी का नैसर्गिक गुण बताया गया है।
स्वरूप और उपासना
हनुमान जी महादेव शिव के रुद्रावतार है, जिन्हें कलयुग का प्रधान देवता भी बताया गया हे। श्री हनुमान जी ‘दास्य भक्ति’ के मूर्तवान स्वरूप हैं। इस अवतार में वे मां अंजनि के गर्भ से वायुदेव के पुत्र के रूप में अवतरित हुए हैं। संकट मोचन हनुमान जी का जप करने से तथा इनकी कृपा लेने से हर प्रकार के कष्ट, संताप, समस्या, उपसर्गबाधा, शत्रुकोप, रोग, शोक, ऋण, दु:ख -दारिद्र, जादू-टोना, नष्ट हो समस्त संकटों से मुक्ति एवं बल, बुद्धि, विद्या तथा सुख, सम्पत्ति एवं भगवद्भक्ति से परिपूर्ण करते हैं। साधक मंत्रजप, पाठ, पूजा एवं व्रत आदि का अपने सामर्थ्य के अनुसार चयन कर सकता है।
मंत्र-आराधना
’ ऊं हं हनुमते नम:।
’ ऊं हं हुं हनुमते नम:।
’ ऊं हं हनुमते मां रक्ष रक्ष स्वाहा।
’ ऊं नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।
साधना प्रक्रिया-नित्य नियम से निवृत्त होकर, चंदन का टीका लगा कर, आसन पर पूर्वाभिमुख बैठ कर अपने सामने लकड़ी की चौकी या पट्टे पर लाल वस्त्र बिछा कर उस पर हनुमत पूजन यंत्र या श्री हनुमान जी की मूर्ति स्थापित कर पंचोपचार (सिन्दूर, चावल, फूल, धूप एवं दीप) से विधिवत पूजन कर उक्त मंत्र में से किसी एक का सवा लाख या कम से कम 24 हजार बार जप करें।
उपासना की विधि
-हनुमान जी की उपासना में उनके किसी मंत्र का विधिवत जप अथवा हनुमान चालीसा, बजरंगबाण, सुंदरकांड या रामायण का पाठ और इसका सामर्थ्य या समय न होने पर पूजन किया जा सकता है।
-हनुमान जी को अड़हुल, गेंदा, गुलाब, कमल एवं सूर्यमुखी के पुष्प, तुलसीपत्र, सिन्दूर, लाल चंदन, ऋतुफल, चूरमा, गुड-चना, केला, शहद-मुनक्का, लाल लंगोटे एवं लाल ध्वजा प्रिय है।
-तुलसी पत्र पर रामनाम लिख कर चढ़ाने से हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
-उपासना के दिनों में लाल वस्त्र धारण कर, लाल वस्त्र का ही आसन व अन्य प्रयोग के वस्त्र आदि लाल ही प्रयोग करें।
-मनसा, वाचा, कर्मणा शुद्धि का पूरा ध्यान रखें। पवित्रतापूर्वक पूजन, मन लगा कर जप, प्रेमभाव से पाठ एवं प्रार्थना करने के साथ दिन में एक बार फलाहार करना चाहिए। ‘ब्रह्मचर्य’ का पालन करना अनिवार्य है।
मेषःभाई बहन अन्य बंधु बांधव से तनाव संभावित है।
क्या करें-शिवयंत्र को घर के पूजन स्थल पर स्थापित कर पूजन करें।
क्या न करें-किसी के विवाद में ना पड़े।
वृषभःधन से संबंधित मामले महत्वपूर्ण रहेंगे, धोखा भी मिल सकता है।
क्या करें-ॐ हिरण्यगर्भाय अव्यक्त रूपिणो नम: का मोती की माला से जाप करें।
क्या न करें-आत्मविश्वास में कमी ना होने दें।
मिथुनःभाग्यवश कुछ ऐसा होगा जिसका आपको लाभ मिलेगा।
क्या करें-दुर्गा मां की तस्वीर के आगे देवी के 108 नामों का स्मरण करें।
क्या न करें-संपत्ति, अन्यत्र निवेश से बचें।
कर्कःनए कार्यक्षेत्र या नौकरी हेतु जारी प्रयास सार्थक होगा।
क्या करें-हरे गणपति घर के पूजन स्थल में स्थापित करें।
क्या न करें-व्यापार में साझेदारी ना करें।
सिंहःशिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में आशातीत सफलता मिलेगी।
क्या करें-ओम हीं घृणि सूर्य आदित्य श्री का तीन माला जाप लाल चंदन की माला से करें।
क्या न करें-शेयर मार्केट में निवेश ना करें।
कन्याःबेरोजगार व्यक्तियों को रोजगार मिलने की संभावना है।
क्या करें-मां लक्ष्मी को लाल पुष्प अर्पित करें।
क्या न करें-मांसाहार से बचें।
तुलाःव्यापारिक सहयोगी से तनाव, क्लेश के कारण मन अशान्त रहेगा।
क्या करें-मां अन्नपुर्णा को दूध से निर्मित नैवेद्य का भोग लगाएं।
क्या न करें-मांसाहार और मद्यपान से बचें।
वृश्चिकःव्यापार विस्तार होगा तथा ससुराल पक्ष से लाभ होगा।
क्या करें-श्री सूक्त का पाठ करें।
क्या न करें-धन का व्यय ना करें।
धनुःआपके प्रभाव तथा वर्चस्व में वृद्धि होगी।
क्या करें-मां लक्ष्मी को दूध से निर्मित नैवेद्य का भोग लगाएं।
क्या न करें-निवेश से बचें।
मकरःवाणी पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है।
क्या करें-हरे रंग का रूमाल अपने पास रखें।
क्या न करें-वाणी पर नियंत्रण न खोएं।
कुम्भःयात्रा देशाटन की स्थिति सुखद व लाभप्रद होगी।
क्या करें-गाय को सरसों का तेल लगी रोटी खिलाएं।
क्या न करें-बड़ों का दिल ना दुखाएं।
मीनःपारिवारिक जीवन सुखमय होगा, आर्थिक लाभ मजबूत होगा।
क्या करें-वट वृक्ष के पत्ते पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाकर उस पर साबुत चावल व एक सुपारी रखकर मां लक्ष्मी के मंदिर में चढ़ाएं।
क्या न करें-घर आए व्यक्ति को खाली हाथ ना जाने दें।
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